वेसे भीे अमीरी और कामयाबी के आगे सच्चाई और प्यार की कोई औकात नही रह जाती।कालेज के सारे अमीर लड़के अपनी महंगी गाड़ियों से निशा और शानु को पाना चाहते है। कोई केसे पैसों के आगे झुक सकता है।और वेसे भी मतलब और बेईमानी से त्रस्त दुनिया से दूरी ही भली है।
रोज़ की तरह निशा अपने घर के पास वाले तालाब के किनारे बैठ जाती है ।और पास की हरियाली और बत्तख के बच्चों को निहारने लगती है। लोगो के मुंह से निकले अपशब्द सुनने से बेजुबानों के बीच सुकून की ज़िन्दगी बिताना काफी बेहतर है। घर पहुचकर वो समर के सफर को आगे पड़ना शुरू करती है। निशा भी एक कहानी लिखना चाहती है जिसमे समर की कहानी को एक अलग अंत मिले।उसकी मौत न हो। और उसकी आगे की ज़िन्दगी वो बयांन करे। वहां अफ़्रीकी हाथी के झुण्ड को ढूंढते हुए समर घने जंगल मे पहुंच गया। उसने देखा की वहां हाथी के बच्चे के पैर मेैं चोट है और वो खून से लथपथ है। आसपास हवाईजहाज हादसे की सालो पुराने अवशेष है जिसके एक टुकड़े से बच्चा चोटिल हो गया है। मदद के किये कोई नही है। समर उसके पास जाके उसको दुलारता है। और अपनी दवाई के डिब्बे मे से उसको पट्टी लगा देता है। फिर आगे अपने रास्ते निकल जाता है। खेर यह विमान हादसा तो अनहोनी थी और अनजाने मैं हुआ था ।पर इंसान जानवरो की ज़िन्दगी को तबाह करने का मौका वेसे भी नही छोड़ता।अपनी गलतियों या मज़े के बहाने उनके जीवन, रहन-सहन , परिवार , आवास और खान-पान सबको नष्ट करते जा रहे है।जिससे जाने अनजाने मे उनको प्रतिदिन लाखों परेशानियों का सामना करना पड़ता है । हमारी आदतों के बदलने तक उनकी ज़िन्दगी का सुधर पाना बहुत मुश्किल है। हमारे परिवर्तन से उनकी ज़िन्दगी मे सुधार होगा।और खुशहाल जीवन की परिकल्पना कर पाएंगे। इन्ही बातों को सोचते हुए समर आगे बढ़ता है और अपना सफर जारी रखता है।
निशा अगले दिन कॉलेज पहुचती है और उसे माहोल बदला हुआ लग रहा था। शुभ बड़ा खुश लग रहा था और शानु के तरफ देखके कुछ बोल रहा था। शानु बार-बार शीशे मैं खुद को निहार रही थी। जब निशा वहां पहुची तो..
शानु- हेलो निशा। केसी है?
निशा - मै ठीक हूँ। पर इतना सज क्यों रही है?
शानु- तुझे बताना भूल गयी ।कल कॉलेज के बाद शुभ आया था मिलने।वो बहुत अच्छा लड़का है यार। आज मुझे ताज होटल ले जा रहा है। फिर हम घूमने भी जाएंगे।और उसने मेरे को यह घड़ी भी दी है। अच्छी है ना?
निशा- घड़ी छोड़। तु उसके बहकावे मे केसे आ सकती है? वो तुझे लालच दे रहा है। तेरा इस्तेमाल करके भूल जाएगा। मना करदे उसे।
शानु- मै तो जाउंगी।तु मुझसे जल मत। तेरे उससे लड़ाई है तो मे क्या करूँ। मुझसे तो माफी मांग ली उसने सारी हरकतों की। तु अपना देख ले।
शुभ - चले शानु हम!
शानु- हा शुभ। ज़रुरु।
बाय निशा। मिलते है कल
निशा इससे बहुत आहत हुई थी।उसकी सबसे अच्छी दोस्त ने दुश्मन का हाथ थाम लिया था।शानु पर उसे सबसे ज़्यादा भरोसा था।
वेसे निशा भूल गयी थी की जब अपने ही अनजान बन जाते है तो लोग किस दोस्ती और प्यार के दम पर खुश होने लगते है। समय आने पर ना तो प्यार के वादे ना उनके साथ बिताये हुए पलो की यादें कोई काम आती है । आपको अपने नए साथी ढूंढने पड़ते है या फिर किताबों को ही अपना हमसफ़र बना लो ।कम से कम धोका तो नही मिलेगा।
इन्ही सब बातों से मायूस होकर निशा कॉलेज से चली जाती है। वो जानती थी की शुभ का साथ शानु के लिए खतरनाक है।और वो उसे नुकसान पहुचा सकता है। पर इंसान के लिए जब पैसा प्यार से बड़ा हो जाए तो उसे कोई नही समझा सकता।और जब तक उसे नुकसान नही होता या सीख नही मिलती। वो सुधरने के बारे मे भी नही सोच सकता।
निशा तालाब के किनारे बेठ जाती है। दिन का समय होने के कारण वहां कोई नही था और निशा के आसुं बहने लगे थे। उसे ज़िन्दगी का सबसे बड़ा झटका लगा था। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था और वो बत्तखों को घूर रही थी।तभी एक आवाज़ उसको सुनाई देती है।
~तुम्हे पता है तुम्हारे गुस्से से उनपर असर पड़ रहा है !
निशा उस लड़के को देखती है जो उसके पास खड़ा है। उसे उसके आने की आहट भी नही हुई। इन बिचारी बत्तखों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है जो तुम इन्हें डरा रही हो! ये स्पेन की बत्तख की प्राजति है।साल मेएक बार यहां आते है। यह बहुत जल्दी डर जाते है। प्यार से देखो नही तो उड़ जाएंगे।
इतना कहकर वो जाने लगता है।
निशा- तुम्हे इनके बारे मे इतना केसे पता?और कोन हो तुम?
लड़का~ मुझे पक्षियों और जानवर से बहुत प्यार है।मैं दुर्लभ जीवों की तलाश मे घूमता हूँ।
और मेरा नाम समीर है।
और तुम्हारा?.......
जारी।

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